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Coronavirus से ठीक होने के बाद भी जिंदगी भर झेलनी पड़ेगी फेफड़ों की बीमारी, स्टडी में हुआ खुलासा

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के खतरे ने सभी को परेशान कर रखा है। चीन (China) के वुहान (Wuhan) शहर से शुरू होकर दुनियाभर में हाहाकार मचाने वाला कोरोना वायरस पूरी दुनिया में कहर बरपा रहा है। ऐसे में दुनियाभर के डॉक्टर कोरोना का इलाज खोजने में लगे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर कोरोना वायरस से बचना है तो आपको अपने फेफड़े साफ रखने होंगे। डॉक्टर भी मानते हैं कि अगर हम अपने फेफड़ों को ठीक रख सकेंगे और अपनी इम्यूनिटी ( immunity) पावर को बढ़ा सके तो हम कोरोना वायरस से लड़ने में सक्षम है।

कोरोना वायरस शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों और किडनी पर प्रभाव डालता है यह फेफड़ों पर बुरा प्रभाव डालता है। माना जाता है जब करोना वारिस किडनी और फेफड़ों पर अटैक करता है तो ज्यादातर यह सबसे ज्यादा पहले नुकसान फेफड़ों को ही करता है। इस बीच एक स्टडी सामने आई है जिसमें पता चला है कि कोरोना वायरस महामारी से रिकवर हो चुके हर तीन में से एक मरीज को आजीवन स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर दिक्कतें झेलनी पड़ सकती है। इस स्टडी में पाया गया है कि मरीज को लंबे वक्त के लिए उनके फेफड़ों में इन्फेक्शन रह सकता है।

30 फीसदी मरीजों को जिंदगी पर सताएगी बीमारी

यह स्टडी ब्रिटेन के अंग्रेजी अखबार टेलिग्राफ ने इंग्लैंड की प्रमुख हेल्थ एजेंसी नेशनल हेल्थ सर्विस की मदद से प्रकाशित की है। स्टडी में कहा गया है कि कोरोना से एक बार ठीक हो चुके करीब 30 फीसदी मरीजों को जिंदगी भर फेफड़ों की बीमारी से परेशान रहना पड़ सकता है। उन्हें रोजाना के काम करने में थकान और मानसिक तकलीफ भी हो सकती है। वहीं, आईसीयू में रहते हुए जो मरीज ठीक हुए हैं, उनके साथ और भी शारीरिक दिक्कतें हो सकती हैं।

बढ़ सकता है आलज़ाइमर का खतरा

कोरोना का बुरा प्रभाव तब देखने को मिलता है जब कोरोना किडनी और फेफड़ों पर अटैक करता है हालांकि ज्यादातर यह सबसे ज्यादा और पहले नुकसान फेफड़ों का ही करता है। स्टडी में बताया गया है कि जिन मरीजों में कोरोना के गंभीर लक्षण पाए गए थे, ठीक होने के बाद भी उनमें शारीरिक समस्या के साथ-साथ दिमागी परेशानी भी हो सकती है। ऐसे मरीजों में आगे जाकर आलज़ाइमर का खतरा भी बढ़ जाता है।

रिपोर्ट नेगेटिव होने के बाद भी रहता है वायरस का असर

इस स्टडी को लेकर नेशनल हेल्थ सर्विस की चीफ हिलेरी फ्लॉयड कहती हैं, 'कोरोना से रिकवर कर चुके लोगों में आगे जाकर होने वाली शारीरिक परेशानियों को लेकर बहुत कम जानकारी मौजूद हैं। ऐसा पाया गया है कि कई मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी वायरस का असर रहता है।'



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