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राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने RTI संशोधन विधेयक को दी मंजूरी, ढांचागत व्‍यवस्‍था पर नहीं पड़ेगा असर

नई दिल्‍ली। लोकसभा और राज्‍यसभा से सूचना का अधिकार संशोधन बिल ( RTI Amendment Bill ) 2019 को राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ( President Ramnath Kovind ) ने अपनी मंजूरी दे दी है। राष्‍ट्रपति की मंजूरी के साथ ही संशोधित आरटीआई बिल तत्‍काल प्रभाव से लागू हो गया है।

राज्‍यसभा से आरटीआई बिल को 8 दिन पहले मिली थी मंजूरी

बता दें कि 25 जुलाई को सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक बिल ( RTI Amendment Bill ) 2019 पर मतदान के बाद राज्यसभा में इस बिल को मंजूरी मिली थी। राज्‍यसभा में मतदान के दौरान प्रस्ताव के खिलाफ 117 और विपक्ष में 75 वोट पड़े थे।

वोटिंग से पहले कांग्रेस ने सदन में इस बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजे जाने का प्रस्ताव रखा था जो खारिज हो गया था। सरकार ने इस बिल को पास कराने के लिए जरूरी नंबर बल पहले ही जुटा लिया था।

टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस, बीजेडी और पीडीपी ने इस बिल पर सरकार का समर्थन किया था।

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समर्थन हासिल करने का ये तरीका ठीक नहीं

इससे पहले राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमें चेयर की पारदर्शिता पर विश्वास है, लेकिन यह किस तरह से 303 सीटें लाते हैं, उसका नमूना आज सदन में देखने को मिला है, ऐसी ही भाजपा 303 सीटें जीतती है।

राज्‍य के अधिकार में हस्‍तक्षेप नहीं

बता दें कि सरकार की ओर से बिल के विरोध पर दलील दी थी कि आरटीआई बिल ( RTI Amendment Bill ) से संवैधानिक ढांचे से छेड़छाड़ नहीं की गई है। न हीं इससे राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप होगा।

वेतन में एकरूपता लाने के लिए संशोधन किया जा रहा है। इस जरिए कार्यकाल में भी एकरूपता लाने की कोशिश होगी। सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा। संबंधित राज्यों को नियुक्ति का अधिकार है।

 

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सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की थी मंजूरी न देने की मांग

सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से इस बिल ( RTI Amendment Bill ) को मंजूरी न देने की अपील की थी।

एक अगस्‍त को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ज्ञापन देने पहुंचे कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के बाद मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया।

सामाजिक कार्यकर्ताओं राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से अपील की थी वो इस बिल पर अपनी मंजूरी न दें।



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