सुप्रीम कोर्ट ने रफाल पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा, दोनों पक्षों से दो हफ्तों में मांगा जवाब
नई दिल्ली। रफाल डील पर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। रफाल मुद्दे पर आज शीर्ष कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। इसके बाद शीर्ष कोर्ट ने दोनों पक्षों को दो हफ्तों के भीतर जवाब देने को कहा।
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Supreme Court reserves order on Rafale review petitions against its December 14, 2018 judgement upholding the 36 Rafale jets' deal. pic.twitter.com/b9gC4s0qCp
— ANI (@ANI) May 10, 2019
याचिकाओं पर केंद्र ने जताई थी आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट में 14 दिसंबर 2018 को रफाल डील पर सुनवाई के बाद फैसला सुनाया था जिसमें कोर्ट ने लड़ाकू विमान की खरीदारी तय प्रक्रिया के तहत होना बताया था। जिसके बाद यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने डील के दस्तावेजों के आधार पर इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं। इसमें गोपनीय दस्तावेजों की कॉपी लगाई गई थीं। इस पर अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने केंद्र की ओर से आपत्ति दर्ज कराई थी। कोर्ट द्वारा सॉवरिन गारंटी के सवाल पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि देशहित के लिए पहले भी अमरीका और रूस के साथ कई समझौते हुए हैं।
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अटॉर्नी जनरल ने उठाए सवाल
अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने शीर्ष कोर्ट में कहा कि याचिकाकर्ता के पास ये दस्तावेज कहां से प्राप्त हुए हैं, यह जानना जरूरी है। इनसे पूछना चाहिए कि ये कागज उन्हें कहां से मिले। ये चोरी के दस्तावेजों के हिस्सों को रख रहे हैं और इनकी नीयत कोर्ट को गुमराह करने की है ।
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याचिकाकर्ताओं का दावा
गौरतलब है कि रफाल डील मामले में केंद्र सरकार ने रिव्यू पीटिशन पर जवाब दाखिल किया था। जवाब में पुनर्विचार याचिका दायर करनेवालों ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा सौंपा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि केंद्र सरकार ने जिस कैग (CAG) रिपोर्ट का हवाला दिया है, उसमें भी कई खामियां थीं। पीटिशनरों ने दावा किया कि CBI ने इस पर कई शिकायत दर्ज कराने के बावजूद मामले की जांच नहीं की। इस CAG रिपोर्ट में 'बैंक गारंटी वेब ऑफ' से संबंधित कोई जिक्र नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने हलफनामे में कहा कि सरकार ने डील से जुड़ी जानकारियां छुपाईं।
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